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मेरे अहबाब को कोई बुरा न कहो।

मेरे अहबाब को कोई बुरा न कहो
अभी जिंदा है इस दिल में उसे मरा न कहो।
उनका चले जाना मेरे लिए इक हादसा था
जो खाली हैं जगह उनकी भरा न कहो।
मैं अभी अभी तो साथ उनके चलना सिखा था
सलामत पैर तो है मगर पैर पर खड़ा न कहो।
ये मिजाज तो रंगीन थे कभी भी अपने
इन खुश्क लबों को मेरे तुम हरा न कहो।
ये और बात है कि मुझे अदू समझ दूर चली गई
मगर जिवन भर तो साथ थी उसे बुरा न कहो।
बचीं की जिंदगी अनुराग यादों के सहारे गुज़ार लेगा
किस्मत का मारा हूं मुझे आवारा न कहो।
©anuragrahi