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मेरे बर्बादीयों पर भी जश्न मनाओ यारों ।

मेरे बर्बादीयों पर भी जश्न मनाओ यारों
जाते-जाते इतना तो काम कर जाओ यारों।
मैने न देखा सहर कभी कामयाबी का
अपने कामयाबी का जलवा दिखाते जाओ यारों।
लोगों को फकत जमाने में शक्ल से मुहब्बत है
मेरे मुहब्बत का भी शक्ल दिखाओ यारों।
यह दिल हर रात कुछ न कुछ सोचकर रोता है
आज रात इसे तुम भी रूला जाओ यारों।
जिनसे खूं के रिश्ते थे मेरे वो मुझे भुल गए
ये दिल्लगी क्या है तुम भी भुल जाओ यारों।
©anuragrahi