मेरे दर्द-ए-दिल अब पुराने हो गए
आपके गली से गुजरे हुए जमाने हो गए।
मैने लिखें थे जो दो अल्फाज़ आपके लिए
पढ पढ कर सब आपके दिवाने हो गए।
कर ली है आपने तर्क-ए-तालुकात मुझसे
शेरों में ही कुछ कह कर आपको बताने हो गए।
जो जिंदगी हमने अपनी तरह से गुजारी थी
वो आलम तो अब जैसे कि अफसाने हो गए।
आपने लगाए थे इस दिल में जो ग़म के पौधे
आ कर देख ले कभी वो अब सयाने हो गए।
©anuragrahi
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