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मेरे एहसास, मेरी कविताएँ।

गुनगुनाते हुए गम के लम्हो में भी गम का एहसास नहीं होता,
बढ़ते हुए कदमों को मंज़िल दूर होने का आभास नहीं होता।
©panditrish