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मेरे ही लहू पर गुज़र औकात कर रही हैं मुझसे ही आमिरों की तरह बात कर रही है…

मेरे ही लहू पर गुज़र औकात कर रही हैं

मुझसे ही आमिरों की तरह बात कर रही है

सितम एक दिन और सितम एक रात कर रही है

वो है दोस्त मगर दुश्मन को भी मात कर रही है

हां हम है एक बदनसीब तू है एक खुशनसीब

डरो नहीं पास आओ दूर से क्या बात कर रही है

अभी तक जो भी मिला है तुम्हीं से तो मिला है

हम तुम को भुल जाए क्या बात कर रही है

यूं तो कभी मेरे तरफ़ मुंह फेर के भी न देखें वो

आज़ जरूरत है तो बार बार मुलाकात कर रही है

न उसके दामन पे है छिंटे न है खंजर पे कोई दाग़

वो कत्ल कर रही है या करामात कर रही है