मेरे हर ज़ख्मों का वो दवा जानती है
मगर आदमी मुझे वो बुरा जानती है।
कहां शबनम बरसाने है और कहां शोले
हमें तड़पाने की वो हर कला जानती है।
रूख से अपने कभी पर्दा हटाया न पर्दानशी
पर्दे में रहकर क़त्ल करने की अदा जानती है।
हम भी शिकार हुए जब उन्हें देखा पहली नज़र
हर हम जैसे आशिकों की वो पता जानती है।
कोई कह दे उसे चाहें क्यूं न पहनें रहें हमेशा नक़ाब
उसके किए जफाओं को ख़ल्क़-ए-खुदा जानती है।
हमने हर जगह पढ़ा इबादत है लोगों को हंसाना
नफ़रत की सिवा क्या क्या अनुराग बेवफा जानती है।
©anuragrahi
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