मेरे जिगर को तड़पा गई वो
फिर वही तेरी पहले सी भुल
आंखें मिलीं पर बातें न हुई
छोड़ चली तुम कदमों के धुल।
मेरे जिगर को तड़पा गया वो
फिर वही तेरा पहले सा भुल
आंखें मिलीं पर बातें न हुई
छोड़ चला तुम कदमों के धुल।
ख्वाब-ओ-निंद में तेरा ये आना
जगा कर हमें फिर तेरा चलें जाना
मुझे तेरी फितरत यहीं न कबुल
मेरे जिगर को तड़पा गई वो
फिर वही तेरी पहले सी भुल
सनम तेरे बाहों के आगोश में थे
हम तो तुम्हारे ही बस में थे
छुपा न सकी मैं मुहब्बत की भुल
मेरे जिगर को तड़पा गया वो
फिर वही तेरा पहले सा भुल।
सुना है तुम अब न देखती हो दर्पण
किस के लिए है सारा ये अर्पण
सनम तेरे होने का जब अहसास न हो
इस से बड़ा न कोई दिल का शुल
मेरे जिगर को तड़पा गया वो
फिर वही तेरा क़दमों के धुल
आंखें मिलीं पर बातें न हुई
छोड़ चली तुम कदमों के धुल।
©anuragrahi
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