मेरे जिंदगी के क़ातिल मुझपर खुदा की है मेहरबानी
मुझे तकल्लुफ मेंं डालो लो अभी तो है मेरी जवानी।
तुझे भी रूला चुका है ग़म मेरा ऐ जुल्फों वाली
और बता रही है ये घटा कि बरस चुका है पानी।
कई जबाव सवाल से मिले कई ख़्वाब बहार से मिले
ये रूह ढुंढता रहा किस महल में है मेरी रानी।
मैंने छेड़ कर जगाया जब कोई हुस्न सो रहा था
और निगाह तुम ने डाली तो संवर गई मेरी जवानी।
अब खैरियत क्या पुछों ब्यान-ए-हालात है रूहानी
बागबां ही जानता है हर कली की कहानी।
गिरे हैं चंद कतरे मेरी इन बेजुबां आंखों से
समझ सकें तो आंसू गर न समझे तो पानी।
©anuragrahi
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