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मेरे मुतमईन आंखों में आब जरा तू लाकर देख

मेरे मुतमईन आंखों में आब जरा तू लाकर देख
मैने रोना छोड़ दिया अब जरा तू रूलाकर देख।
तेरे बदन की खिदमत में हमने सारी उम्र जिया
अपने हुस्न की अदा से अब जरा बहला कर देख।
गोरी गुलबदन पर इतना तू गुरूर न कर
भुला सकती हो गर काला तन तो जरा भुलाकर देख।
मेरा जिस्म तो बस खुशियों का ही एक गुलजार है
अपने बदन को भी इस से जरा मिलाकर देख।
अब तो मेरे रंग महल में बच्चों की किलकारी है
हवस की भुख मिट जाएगी इनको गले लगाकर देख।
ये ही चांद है ये ही तारें और यहीं है सुरज भी
करना हो खुद को रौशन आंगन मेरे तू आकर देख।
अपने दिल की नुमाइश में क्या क्या मैंने लिख दिया
मिट जाएगा गर गलत है खुद से जरा मिटाकर देख।
©anuragrahi