V

मेरे राम जी

छरहरी काया मेरी जाने
कहाँ छूट गई
छाने लगा मुझ पे मोटापा
मेरे राम जी
मारवाड़ी सेठ जैसा,
पेट मेरा फूल गया
कल को पड़े न कहीं छापा
मेरे राम जी
रसभरे बैन कहाँ, घर
में भी चैन कहाँ
खो न बैठूँ किसी दिन आपा
मेरे राम जी
🌹🌹🌹
©vikasgarg