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मेरे रफिक तू अदू कब से हो हो गए ।

मेरे रफिक तू अदू कब से हो हो गए
ये जान तो तेरी है क्यूँ दुश्मन हो हो गए।
मेरे मंजिल का रहबर तो तुम्हीं हो
तेरे बिन न जाने रास्ते कहाँ है खो गए।
मेरे हर ख्याल का राब्ता तुझी से है
फिर इस कदर खफ़ा क्यूँ हो हो गए।
हालात बिछड़ने का मुझसे मत पुछो
ये जिस्म बनकर खाक जैसे मिट्टी में खो गए।
जबसे है तू रूठी तो नुकसान ये हुआ
होंठों से दुर कहाँ मेरे हंसी है हो गए ।
मुद्दतों से अनुराग को है उसका तलाश
तेरे मेरे बिच जो बिज नफरत के है बो गए।
©anuragrahi