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मेरे साथ गुजारे हुए लम्हों का हिसाब रखना ।

मेरे साथ गुजारे हुए लम्हों का हिसाब रखना
मैं आऊंगा इक रोज़ जरूर मेरे सवालों का जवाब रखना।
गर्दिश-ए-वक्त ने अभी थाम रखी है रफ्तार-ए-कदम
एहसास के सहारे दिल में यादों को मेरे शादाब रखना।
परवाना मैं था दिवानी तू भी तो थी हकीकत ये है
वैसे ही,जब मिलो चेहरे पर कायम इज्तिराब रखना।
मेरी दुनिया से बहुत दूर चल गए हैं उजाले के जुगनू
बचा कर मेरे खातिर अपने दिल का अफताब रखना।
रात होंगी आंखें मुंद लेंगे शायद तूझे सपनों में खो न जाए
ऐ खुदा कल फिर सुबह महबूब का मेरे अंदर सराब रखना।
©anuragrahi