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meri aakhri khbahis khuda se

गुजरते हुए लम्हो से गुजारिश है
खुदा से खुद के लिए ख्वाहिश है
ये कैसी सजा दे रहा है मुझ को
क्यों लड़ रहा हु खुद के लिए ये कैसी
तेरी मुझ पर जोर आजमाइश है
जीवन दिया है तो चैन से जीने दे
नही आती तुझे मेरे चेहरे पर मुस्कराहट रास
तो क्यों छोड़ रखा है भटकने के लिए
इस से तो अछा है बुलाले अपने पास
जिंदगी भी गुजर जायेगी एक दिन इसी फिक्र में
में तो रहूंगा ही नही मिलूंगा तो वो भी जिक्र में
दो लम्हे मुझे भी खुशी के गुजारने दे
बना रहा है कोई अपना उसे अपनाने तो दे
यु तो उसे भी नफरत नही मुझ से
पहले नाम मेरा उसकी जुंबा पर आने तो दे
दो पल उसके साथ गुजरने है जीवन के
उठना तो बैसे ही एक दिन सबको
उस से पहले एक पल उसकी बाहों में गुजारने तो दे
©deepakshar