तुम रोज निहारती तो होगी उस चाँद को
पर तुम्हे क्या पता की उसमे भी तुम्हारी परछाई है
तुमने कभी तो महसूस किया होगा की कभी चाँद से बाते करते वक़्त कोई ठंडी हवा तुम्हारे चेहरे को छुती तो होगी
अब कैसे बताये तुम्हे की तुम चाँद को देखती हो आसमान में ओर हम उस चाँद को जमी पर आइने में देखते है
और उसी चाँद पर अपना हाथ फेरते है
©deepakshar
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