कुछ पल की बातें,
कैसे दोस्ती में बदल गई पता नहीं चला।
कुछ हंसाने कुछ तराने याद आते है,
तेरे साथ बिताए हुए सारे पल याद आते।
ए दोस्त मैं जब तेरे साथ होता था,
तो पता नहीं कब सुबह से शाम हो जाती थी।
अब हर पल ऐसा लगता है ए दोस्त,
जैसे समय रुक सा गया है।
राह में चलते चलते मंजिलें तो मिल गई,
लेकिन तेरी दोस्ती छूट गई।
बचपन में देखे गए ख्वाब सब पूरे हो गए,
लेकिन तेरे बिना सब अधूरे से लगते है।
ए मेरे दोस्त एक बार फिर लोट आ,
फिर से वो बचपन के पल जीते है।
©aditisri14
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