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" मेरी आन बान और शान तिरंगा मेरी जान "

" मेरी आन बान और शान तिरंगा मेरी जान "
घर की लक्ष्मी को रोता हुआ छोड़ आया हूँ,
मेरी नन्हीं सी कली को खिलता हुआ छोड़ आया हूँ,
मुझे अपने सीने से लगा लेना ऐ भारत माँ,
मैं अपनी माँ की बाँहों को सूना छोड़ आया हूँ।
जमाने भर में मिलते हैं आशिक कई,
मगर वतन से खूबसूरत कोई बालम नहीं होता,
नोटों की शय्या पर मरे हैं कई,
मगर तिरंगे से कीमती कोई कफ़न नहीं होता।
यह बात हवाओं को भी बताए रखना,
रोशनी होगी चिरागों को जलाए रखना,
लहू देकर जिसकी हीफाजत हमने की,
ऐसे तिरंगे को सदा दिल में बसाए रखना।
~ मनिषा शर्मा
©luckypande