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मेरी जां तू दिल के मेरे तेवर को समझा कर।

मेरी जां तू दिल के मेरे तेवर को समझा कर
मुंह फेर कर अभी न मुझसे तौबा कर।
टुटा हुआ बेकार पैमाना हूं सही मगर
मुझे मयखाने से इस तरह न फेंका कर।
मेरे ये बदन के बिखरे हुए शिशे न चुभ जाए
एलबम में की तरह महफूज संभाल के रखा कर।
इश्क़ की जुनूं ही होती है कुछ ऐसी
ऐसे मुसाफिरों से मंजिल न कभी पुछा कर।
तुम पैरहन बदल बदल कर रोज़ सामने से गुजरती हो
इस दिल के हालात के तरफ भी देखा कर।
जलवा ही है जलवा पर्दा ही है बस पर्दा
अनुराग की ओर चिलमन से न झांका कर।
©anuragrahi