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मेरी माँ

भेजा है खुदा ने तुझे फरिश्ते के रूप में
ममता भरी है तेरे कोमल स्वरूप में
मुझको रखा छाया में
खुद को रखा धूप में
खुदा मिला है मुझे तेरे स्वरूप में
चलना सिखाया जिसने अँगुली पकडके
अब छोड दिया साथ उसका पल भर में
जीने की राह दिखाई मेरे बचपन में
भूल गया मैं सब पल भर में
काटा लगा मुझे पर दर्द तुझे हुआ
मरहम लगा मुझे पर असर तुझे हुआ
राहत-सी मिली मेरे दिल को जब मैने
तुझे छुआ
गले मिलकर तेरे मेरा हर गम दूर हुआ
फूलों की खूशबू हो सकती है कम
पर तेरा प्यार नही
तेरे बिना जी सकू,
इतना मैं होनहार नहीं
- राहुल जागिड़