मेरी प्यारी नन्ही काजल बिटिया चुपके से सो जाना तुम
हिरणी आंखें घुंघराले भुरे बाल चंचल चित निराले चाल
सुर्य सा जैसा तेज मुख पर मधुर सुरीली आवाज प्रखर
हमसे इतना नेह लगा कर छोड़ कर मुझको न जाना तुम।
हमसे बड़ी है चुक हो गई खुद की जान अब बोझ बन गई
हम न समझें दर्द-ए-मर्ज तेरी तुझपे उल्टे हर इल्जाम फेरी
नाचती रही पापा पापा कह कर फुलों पे जैसे नाचे मधुकर
जब जब निहारूं मैं चंदा को नजर मुझे बिटिया आना तुम।
वैधों हकिमो ने कह दिया है कि ईश्वर ने तुम्हें न्योता दिया है
तुम तो आयी हो ही बनकर पराई सह लेंगे हम ये तेरी जुदाई
मगर जा कर तू ये मेरी हालत अपने ईश्वर से बताना तुम
मुझे भी इस नर्कलोक से स्वर्गलोक में जल्द ही बुलाना तुम
मेरी प्यारी नन्ही काजल बिटिया चुपके से सो जाना तुम
जब भी तुम फिर आना चाहो मेरे गोद में ही आना तुम ।
मेरी प्यारी नन्ही काजल बिटिया अब हम सब से विदा होने के
लिए तैयार हो चुकी है डाक्टरों के मुताबिक वो हमारे घर की कुछ ही दिनों की मेहमान है इसलिए मैं अपने बेटी को अपना संदेश एवं अपने भुल चूक की याचना इस कविता में किया है
ईश्वर से उसकी सुखद परायण की कामना करता हूं।
©anuragrahi
S