मेरी सोच अक्ल से फिसल गई! मुझे याद थी की बदल गई
मेरी सोच थी कि वो ख्याब था ! मेरी जिंदगी का हिसाब था
मेरी मुस्किलो की अक्स थी ! मुझे याद थी कि वो सोच थी
जो ना याद था तो गुमह था !!!!
मुझे बैठे बैठे गुमा हुआ
गुमा नही खुदा था वो ! मेरी सोच नहीं खुदा था वो
वो खुदा कि जिसने जुबान दी ! मुझे दिल दिया मुझे जान दी
वो जुबा जिसे ना चला सका ! वो जान जिसे ना लगा सका
कभी मिले तो तुझसे बताए हम !तुझे इस तरह से सताए हम
तेरा इश्क तुझसे छीन के ! तुझे महफिलों में भुलाए हम
तुझे दर्द दू तू ना सह सके ! तुझे दू जबा तू ना कह सके
तुझे दू मकान तू ना रह सके!!!
तुझे मुश्किलों में घिरा के मै कोई ऐसा रास्ता निकाल दू
तेरे दर्द की मै दवा करू ! तुझे हर नजर में उबोर दू
तुझे जिंदगी का सहुर दू ! जो कभी मिल भी जाए तो गम ना था
कभी गिर भी जाए तो गम ना था ! मेरे दिल के कोने में सक नहीं
तेरी नियातो को तू साफ कर ! तेरी नियातो को तू साफ कर
विकास उत्तम
23 सितंबर 2020
©vikky
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