वह राणा अपना कहाँ गया,
जो हुकारें भरता था।
वह महाप्रतापी कहाँ गया ,
जिससे काल युद्ध में डरता था।
जिसके चेतक को देख- देख मृगराज ,
दंडवत करता था।
वह वीर प्रतापी कहाँ गया,
जिसके भाले को देख-देख खडग निज तेज खण्डवत करता था।
जिसके रण कौशल को देख देख अकबर भी रण में डरता था ।
©shivatomar
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