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महबूब ने दिलबर के तरफ़ नहीं देखा।

महबूब ने दिलबर के तरफ़ नहीं देखा
ज़रूरत प्यार की थी कभी प्यार से नहीं देखा।
इश्क इतना तो नासमझ न हैं यारों कि
इश्क हो जाएं और चेहरा तक नहीं देखा।
डराती रहीं मुझे मुफलिसी हरदम
फिर भी मेरी अना ने किसी के तरफ़ नहीं देखा।
सफ़र-ए-जिंदगी का इस कदर बदल गया मिजाज
फिर उसने मुड़कर मेरे तरफ नहीं देखा।
ललक था मुझे उनसे उल्फत-ए-बेकरारी का
मगर जोहरा जबीं ने मेरे दिल के तरफ़ नहीं देखा।
जो भी आईना देखा फकत आईने पर झुंझुलाया अनुराग
किसी ने अपनी कमी के तरफ़ नहीं देखा।
©anuragrahi