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मिजाज में उसके इतना जो वहशत है ।

मिजाज में उसके इतना जो वहशत है
बेवजह लोगों में उसका दहशत है।
हम समझाए भी किसी को तो कैसे
दिल जंचता नहीं मुझपर ठिकाना जो मेरा गुरबत है।
लोग पास रहकर भी किसी से जुस्तजू गुफ्तगू नहीं करते
मेरा तो भला वैसों वैसों से जमाने की फुरकत है।
मगर मै कैसे बताऊं जान-ए-जां कि मुझे
तुम वही हो हजारों में जिससे मेरी उलफत है।
जिंदगी अब फिसलने वाली है पहाड़ की ऊंची चट्टानों से
आकर थाम ले मेरा हाथ मुझे तेरे साथ की जरूरत है।
इश्क की तालीम भी तो फकत है हुस्न परस्ती
इसके सिवा अनुराग और क्या जिस्म की उजरत है।
©anuragrahi