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मिलोगे न...

एक साथ रहते रहते
कब जुदा होने का समय
आ गया..पता हीं नहीं चला
राहें जुदा
मंजिल जुदा
शहर जुदा
बिरादरी जुदा
बस एक जो एक जैसा था
वो हमारा प्यार था
जिसकी कसम से
दोनों बंधे थे
मगर दुनियां कहां परखती है
दिल को..
उसे तो दुनियादारी चाहिए
मगर बिना दिल मिले?
बेशक...
तुम ढंग से निभाओ या नहीं
कभी नहीं सोंचती
अपनी जिम्मेदारियों को
पूरा करना जानती है
चाहे आप दुखी रहें या सूखी
चलते चलते उसने
कहा था...
मिलोगे न...
अभी भी अकेले में
उसकी यही आवाज
मुझे पुराने दिनों की याद दिलाती है
©newera