भाव की महिमा में श्रेष्ठतर जो भाव है
उसी को कहते लोग मित्रवत व्यवहार है
होती जब जहां मैं उलझनो की बात है
तो मित्रता ही सुलझनों की अद्भुत एक पतवार है
चंचलता की गहनता को छूता मुस्कुराहट का पहरेदार है
यह मित्रवत व्यवहार ही भावनाओं आंतरिक दरकार है इंसानियत को सींचता अद्भुत सलाहकार है
हृदय में स्थित सरलता का करता ऐतबार है
मासूमियत में दिखता सात्विक यह भाव है
खुशियों से करता यह बुराइयों को पार है
हृदय में आज के दिन एक ही गहन भाव है
इस व्यवहार को समझना ही बेहतरी का द्वार है ।।
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