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मजदूर

मिट्टी से मकान तक, दर से दुकान तक.
रोजमर्रा के सामान तक, में करते हैं श्रम प्रदान.
ये है भारत के मजदूर महान.
पैर में न जूता है, सर पे न है टोपी.
वारिस और घूप में भी नहीं होते हैं वो परेशान.
ये है भारत के मजदूर महान.
खेत से खलिहान तक गाँव से गोदाम तक.
सब करते हैं भरपूर काम.
ये है भारत के मजदूर महान.
पसिना से नहाता है वो, हक किसी का नहीं खाता है.
दुखाता नहीं है दील किसी का, रहता है वे बडे शान से
ये है भारत के मजदूर महान.
देश के बिकास में अहम भूमिका निभाता है वो.
नहीं मिलता है श्रम का उचित दाम.
और नहीं खरीद पाता है वो जरूरत का सामान.
ये है भारत के मजदूर महान.
©amrendraku