मकसुद है जिस दिल से वो दिल है बेगाना
कैसे करे इन्हें हासिल,हो गया दिल दिवाना।
लफ्जों की इबारत है अश्को की स्याही से
तिरछी निगाहों से पढ लें,हूं आशिक कोई पुराना।
हसरतों के पन्नों पे बस तेरी नुमाइश है
जीवन की आरजू बस,मुकम्मल हो दिल लगाना।
हर प्यार की साये में छिपी हुई है जवानी
कोई दिल है काफिर,तो कोई दिल है मस्ताना।
ताउम्र मैंने रब से तुझे पाने की दुआ की है
अब हालात नहीं ऐसे,कि कह दो तू मत आना।
मेरे घर में भी बहुत वाइज़ से फरिश्ते है
तेरे लिए अनुराग न सुना,न किसी का माना।
©anuragrahi
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