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मन

में बसा लू या बस जाऊँ
ये ही तो है जो गिरकर भी संभल जाऊँ
चलना है वक़्त की दीवार पर बनकर
जो ठहरकर भी इस जहाँ मे सबसे आगे निकल जाऊँ
चल आज मान लेते हैं
जिंदगी की कमान संभाल लेते हैं
चलते हैं आसमाँ की ऊंचाईयों में
वहाँ से दुनिया को संभाल लेते हैं
©5bharat