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मन की गुब्बार।

जईसे ई अंखियां में अन्हार भईल बा
बेकार जिनिगीया हमार भईल बा ।
जब तोहरो साथ रहे दिल में उल्लास रहे
हर सुख जगवा के उ हमरो पास रहे
लागत बाके एकेबेर-२ सब दुख सवार भईल बा
बेकार............... ......... भईल बा ।
न रहनी कऽहउं के न रहनी केकरो हम
घर बार छुट गईल हो गईनी बेघरऽ हम
न जानी गुस्सा काहे-२ गंवा-ज्वार भईल बा
बेकार.... ........................... भईल बा ।
तोरे ही सपनवा के रतिया बितइती
ई लोगवन से दुर कहीं दुनिया बसइती
एही खातिर अनुराग के-२ दिल गुब्बार भईल बा
बेकार जिनिगीया हमार भईल बा
जईसे ई अंखियां में अन्हार भईल बा
बेकार जिनिगीया हमार भईल बा
बेकार जिनिगीया हमार भईल बा ।
©anuragrahi