बचपन में हर रोज मंदिर जाते था,
भगवान के आगे सिर झुकाते था,
पंडित के मुख से आरती सुनता था,
शंख की नाद से मेरा मन खिलता था,
अखियों को नित्य प्रभु दर्शन होते थे,
मुख से भी प्रभु नाम बोलते थे,
ऐसा प्रसाद जो भी हर रोज मिल जाए,
मेरे तो सातों जन्म से खिल जाए
🌹विकास गर्ग🌹
©vicky
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