मंहगाई ...मंहगाई ....मंहगाई
हल्ला मचा रहे हो
दिमाग का फतूर बढ़ने से रोक लो
महंगाई भी रुक जायेगी
एक पागल यही कहते सुना है मैंने
जीवन स्तर को
ऊपर उठाने की बात तो करते हो
उपग्रह पे बस्तियां बसाने की
तैयारियां भी हैं तुम्हारी,
फ़िर स्वप्न क्यों देखते हो
एक चवन्नी में
दस किलो देशी घी
और एक टक्के में मनो अनाज का
जानते नही क्या.
धरा से अब अनाज
मेहनत और पसीने से नही उगता
जमीन की भूख भी ज्यादा हो गई है,
जंक फ़ूड का ज़माना है,
उसे भी खाने को यूरिया
और पीने को कीटनाशक चाहिए
यूँ ही बवाल मचा देते हो
महंगाई ..महंगाई....महंगाई
डीजल .पेट्रोल के भाव बदने पर
हड़ताल करते हो.
नवीनतम मॉडल कार का
कौन सा आया शो रूम मे
हर महीने क्यों पड़ताल करते हो
सबसे मंहगी हो इस
शहर में मेरी कार
ये फतूर दिमाग में किसने बढाया
..?
फिर तेल के रेट बड़े तो
कहते हो महंगाई हो रही है
मंहगाई कब नही थी
कल ...............?
बरसों पहले........?
सदियों पहले ......?
मंहगाई
सर्वदा सर्वत्र विद्यमान रहती है,
निर्धन के लिए
मजदूर के लिए
अभावग्रस्त मेहनतकश के लिए..
बाकि सब के लिए तो
वरदान होती है
कर्मचारी का महंगाई भत्ता
कवियों की पुरुस्कार राशिः
कभी तिगुनी
कभी पाँच गुनी
राष्ट्रपति का वेतन .....
चपरासी का वेतन
आयोग चिंतित है
और
बार बार बैठते है
किसानों के लिए भी आयोग
व्यापार के आयोग
नित नित नए नए प्रयोग
सोचता हूँ की
कभी भूख को
गरीबी को
और रोज पिसते आम आदमी को
आयोग क्यों नही मिला.?
दूध बिजली दवाई से लेकर
हर छोटी बड़ी चीज़ को
महंगाई के नाम पर
कैश करा रहे हो
और हल्ला मचा रहे हो
मंहगाई .मंहगाई ...मंहगाई
काश आप को भी एक
पागल की आवाज सुनाई दे
और मंहगाई पर
खामखाँ की बहस बंद हो ......
मंहगाई ...मंहगाई ....मंहगाई
हल्ला मचा रहे
मॉर्गन अमित ठाकुर
©AMIT KUMAR
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