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मंजिल के मुसाफ़िर

थक कर ना बैठ ए मंजिल के मुसाफिर मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आएगा......
नित नए सपने तू देख
पूरा करने का उन्हें रख हौसला
अगर लक्ष्य तेरे है बुलंद तो सपने भी सच होंगे
और सच होने का मजा भी आएगा......
दूर कर अपने मन का अंधेरा चल उठ अपनी पहचान बना
अंधेरी राहों में जला कर दिया
तू मुश्किलों को आसान बना......
आगे तुझ में है शक्ति कुछ करने की तो तुझे वह पहचान भी मिलेगी
थक कर ना बैठ ए मंजिल के मुसाफिर मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आएगा.........
हौसला बुलंद कर राहों पर चल दे
तुझे तेरा मुकाम भी मिल जाएगा अकेले....
तू पहल कर काफिला खुद बन जाएगा
मायूस होकर ना उम्मीदों का दामन छोड़......
वरना खुदा नाराज हो जाएगा.......
ना कामयाबी की धुंध से घबराना कामयाबी का सूरज तेरी तकदीर रोशन कर जाएगा....
तू थक कर ना बैठ ए मंजिल के मुसाफिर मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आएगा.....
Ranjana jeena Bisht
©ranjnana