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मंजिल की पहचान किस को है

मंजिल तो बहुत सी है यहॉ
मगर मंजिल की पहचान किस को है
जिंदगी बहुत छोटी है यहाँ
मगर जिंदगी की फिक्र किस को है
समय भी बहुत कम है यहाँ
मगर समय की कद्र किस को है
मतलबी दोस्त भी बहुत है यहाँ
मगर उनकी पहचान किस को है
झूठ बोलने बाले भी कदम कदम पर खड़े है यहाँ
मगर सच बोलने बालो की पहचान किस को है
मौसम की तरह भी रंग बदलते है लोग यहाँ
मगर उन लोगों की पहचान किस को है
सभी लोग बढ़ रहे है अपनी अपनी मंजिल की तरफ यहाँ
मगर सही राह की पहचान किस को है
सभी लोग पाना चाहते है यहाँ मंजिल अपनी अपनी
मगर यहाँ फिक्र किसकी किस को है
सब चढे जा रहे है एक दूसरे के ऊपर यहाँ
मगर ऐसे कोन जाने मंजिल किस को मिलेगी

मत करो इंतज़ार किसी का की कोन राह दिखायेगा यहाँ
अगर मंजिल तलब है तुझे तो यहाँ अपनी राह खुद बनायेगा
अपनी राह खुद बनाने बाले को यहाँ
मंजिल खुद बे खुद मिलेगी
©deepakshar