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मंजिल की सफलता

मंजिल का कोई पता नहीं,
गलत और है क्या सही।
निर्णय जो कि कठिन आति,
जला दे मन की बुझी ज्योति।
विविध मार्ग मंजिल तक जाता,
रुचि है किस में जो समझ ना आता।
निरंतर श्रम व प्रयास के बल पर,
बढु सदा दिल के अधीन चलकर।
विकारों के अनुरूप कभी ना है जाना,
जीवन में अगर मकसद को है पाना।
बेकार के मौज मस्ती त्याग देना अब,
एकाग्रता अवश्य हि बढ़ना सब।
जीवन में सदा अनोखा मार्ग अपनाना,
स्थूल जगत में मन ना है भटकाना।
मन सदा सही दिशा में लगे,
रुचि व अभिलाषा हृदय में जगे।
धीरज धड़ी बढ़ते जाना है,
मंजिल प्राप्त करके दिखाना है।
जो भी मार्ग से विमुख है होता,
पूरी जिंदगी में सदा व्यर्थ ही रोता।
©raushan