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"मनोस्थिति"

मन है तलाश में ,
शांति के आभास में,
कभी वो तन्हा, कभी भीड़ में
हर मधुर एहसास में ,
कभी सवेरे की चाह में,
कभी रात्रि के विश्राम में
रहता है वो इस अजनबी दुनिया में ,
अंतर मन की तलाश में,
किसी चेहरे की मुस्कान में,
हर चंचल क्रियाकलाप में ,
समझ ना पाए कहां है
वह पर है वो गहन तलाश में ,
कभी वो बच्चा, कभी समझदार ,कभी वो रहता एकांत में, मन की है यह दास्तां ,
मेरे दिल के बागबान में....
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