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बहुत खुश थी मैं तेरे दस्तक से
तुने एक नये तरीके से दुनिया मुझे दिखायी थी,
कभी कहा नही तुझसें पर तुने तुझमे मुझे मेरी परछायीं दिखाई थी
तुझें देख कर अक्सर ये सोचती थी
क्या इस उम्र मे मै भी ऐसी हिं थी
प्रण किया था जों कुछ भी गलत मैने तजुर्बा किया कभी तुझे नही करने दूंगी,
इस संसार कि सारी खुशियाँ मैं तुझको लाकर दूंगी
बहुत मज़बूत मैं महसूस करती थी जब तू माँ बोलता था
जाने कौन सा तुफान आया था तुझे उड़ा कर ले गया था
एक झोंके में तू बहुत दूर निकल गया था
जब तक मैने पलट कर देखा आंखों से तू ओझल हो गया था
बहुत आवाज़ें दी तुझे पर तू लौट कर नहीं आया
मुड़ा एक बार तू बहुत खुश थी मैं तू वापस आ गया
पर तू तो मुझे एक पाठ पढ़ाने मुड़ा था
"मै तेरी बहुत इज्ज़त करता हूँ
मत कर मुझे मजबुर वॉट्सएप्प कि भाषा मे कह गया ब्लॉक कर दूँगा"
सहम गई मेरी अंतरात्मा भी ये सोच कर,
कैसे सहूंगी ये अपमान मुड़ गई ये सोच कर,
ये शायद वक़्त कि मार है,
या कोई कमी रह गई होगी जो
आज सब ले गया तू....
written by sanskriti maa
©poetic_flo