मोहब्बत सिर्फ़ पा लेने का नाम नहीं होती... 🖤✨
मोहब्बत तो वो एहसास है,
जो फ़ासलों में भी साँस लेता है,
जो दूरियों की धूल से धुँधला नहीं पड़ता,
बल्कि वक़्त के साथ और निखरता जाता है।
बड़े-बड़े वादे करना आसान होता है,
चाँद-तारे तोड़ लाने की बातें भी...
मगर सच्ची मोहब्बत अल्फ़ाज़ों की मोहताज नहीं होती,
वो ख़ामोशी से तुम्हारा हाथ थामती है
और हर अँधेरी रात में तुम्हारे लिए उजाला बन जाती है।
वो साथ होकर साथ रहने की ज़िद नहीं करती,
क्योंकि उसे मालूम होता है कि
जिसका ठिकाना दिल में हो,
उसे फ़ासले जुदा नहीं कर सकते।
सच्ची मोहब्बत वक़्त नहीं देखती,
न घड़ी की सुइयों से अपना रिश्ता जोड़ती है।
वो तमाम मशरूफ़ियतों के बीच भी
तुम्हारे लिए एक मुकम्मल लम्हा बचाकर रखती है।
उसे तुम्हारे हुस्न से इश्क़ नहीं होता,
वो तो तुम्हारी थकी हुई आँखों में भी ख़्वाब तलाश लेती है।
काले घेरों में छुपी बेचैनियाँ पढ़ लेती है,
झुर्रियों में गुज़री उम्र की कहानी देख लेती है,
और सफ़ेद बालों में भी वही चमक महसूस करती है
जो पहली मोहब्बत के दिनों में हुआ करती थी।
सच्चा इश्क़ हर रोज़ नया जन्म लेता है,
हर सुबह दिल में एक नई रौशनी भर देता है।
इंसान जितना उसे जीता है,
उतना ही उसके क़रीब होता जाता है।
फिर उसके लिए दिन क्या, रात क्या...
सर्द हवाएँ क्या, बरसातें क्या...
मोहब्बत हो तो हर मौसम अपना लगता है,
हर इंतज़ार इबादत सा लगता है।
और अजीब बात तो ये है कि
इश्क़ में तकलीफ़ें भी सुकून दे जाती हैं,
ज़ख़्म भी दुआ बन जाते हैं,
बदतर हालात भी मुस्कुराने की वजह दे जाते हैं।
कठिन रास्ते आसान लगने लगते हैं,
लंबे सफ़र छोटे लगने लगते हैं,
क्योंकि जब कोई दिल में बस जाए,
तो उसकी याद भी हमसफ़र बन जाती है।
आख़िर मोहब्बत साथ रहने से कहाँ मुकम्मल होती है...
मोहब्बत तो तब मुकम्मल होती है,
जब दो लोग एक-दूसरे की रूह में उतर जाएँ,
और फिर उम्र भर वहीं आबाद रहें... 🥀❤️
"कुछ रिश्ते हाथों से नहीं,
दुआओँ से थामे जाते हैं..." ✨🖤
I