आज कल मशरूफ है हर कोई
हर किसी को मोहॉबात के नाम
पर पागल बनाने में उन्हें सपने दिखाने मै
और फिर जब आप उनके सपनों में
उनके खायालनो मै मशरूफ होने लगते है
तो वहीं ख्याल वहीं वादे कस्मे
वो तोड़ के जाने लगते है
आखिर क्यों दिल मै ये ख्याल आता है
पर समझ ये भी आता है कि इंसान बचपन में खिलौनों से खेलता था
फिर दिलनो से खेलने लग जाता है।
हाय ये मोहोबात 😊😊
©gouritiwar
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