क्या करूं मां तेरे बिना रहने की आदत जो नहीं है।
तेरी इन यादों में अक्सर केही खो जाया करता हूं।
तुझसे दूर जाकर अपनी आत्मा को निश्चल पाता हूं।।
क्या करूं मां तेरे बिना रहने की आदत जो नहीं है।।
तेरे इन यादों को अपने दिल में सवेरे बैठा हूं।।
जब तू दूर जाती है तो इन यादों में खो जाया करता हूं।। क्या करूं मां तेरे बिना रहने की आदत जो नहीं है।।
©himanshu.k
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