A akkshat28 en July 23, 2025 मर के देखते हैं इस जंहा -ए-मौहब्बत थोड़ा और ठहर के देखते हैं .....इतने गुनाह किए हैं इक गलती और कर के देखते हैं.....कब तक यु खुद से ल़ड़ते रहेंगे या तो जिंदगी जीते है या फिर...मर के देखते हैं.... ©akkshat28