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मृदुल राग : संवेदना का स्रोत

मृदुल राग : संवेदना का स्रोत
ओ मृदुल, तुम हो कहाँ,
देखो, शब्द कितने चुभ रहे।
ज़रा घोल दूँ तुम्हें यहाँ,
सुनो, कितना अद्भुत लगे।

मिला किसी को ध्यान क्या?
न जाने कहाँ खो गया।
खोज ले इसे अभी,
तो एकाग्र भी पा गया।

सौम्या की मांग थी,
पर रोष का है आगमन।
विष जड़े वचन कहे,
करे बोध का भी पतन।

समझ कहाँ भूल आए?
क्या विवेक न था साथ में?
निर्णय ये कठोर अब,
रखा साधना के भाग में।

मिल गए सब हमें,
थे आत्मा के धाम में।
प्रफुल्ल को भी जोड़ के,
कथा सुने श्याम के।

संदेश विस्तार से,
विदुषियों की दरकार में।
दर्शकों की भीड़ में,
प्रेम का समाचार है।