दृढ़ता का मटका लिया करो....
आत्मविश्वास की बूंदों से जिया करो....
मेहनत का घूंट तुम पिया करो....
और मन की तपन को शीतल किया करो..
शरीर को तपन से पका लिया करो....
और मटके का आकार लेकर,
हर सांचे में तुम समां लिया करो....
तुम भी शीतल रहा करो और,
औरों को भी शीतलता दिया करो....
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