मुझ में हुनर नहीं साथ रहबर नहीं घर में मेहर नहीं।
अमिरों की शहर में घर एक गरीब का लूट गया
मैंने जब जब दिल लगाया दिल टूट गया
किसकी बद्दुआ है मुझे कोई कबूल नहीं करता
जिसे अपना कहा वो ही हमसे रुठ गया
साक़ी आज तू भी नहीं पिला पाओगे जाम मुझे
जह़र जो उसकी आँखों से पी कई घूंट गया
सवारने जिंदगी को शहर की तरफ चला था मैं
जिंदगी गाँव में माँ के पांवों तले छूट गया
मुझ में हुनर नहीं साथ रहबर नहीं घर में मेहर नहीं
देखिए किसमत अनुराग का है कैसे फुट गया।