मुझे गम समझ कर भुला न दो
मैं इश्क का एक नासूर हूं
मुझको समझना जरा मुश्किल है
यही दिलजलों का कुसूर हूं
मुझे गम समझ कर भुला न दो
मैं इश्क का एक नासूर हूं।
तन्हा कभी जब तुम हो जाओगे
मौजूदगी मेरा तुम वहां पाओगे
शोख-ए-मन का मैं फितूर हूं
मुझे गम समझ कर भुला न दो
मैं इश्क का एक नासूर हूं ।
तेरे पलकों की मिठी आगोश में
बैठा हुआ हूं वहां मैं मदहोश में
ख्वाब आपका ही मै हुजूर हूं
मुझे गम समझ कर भुला न दो
मैं इश्क का एक नासूर हूं ।
कभी हंसती हो कभी रोती हो
कुछ न किसी से मगर कहती हो
इसी दर्द-ए-दिल का शुऊर हूं
मुझे गम समझ कर भुला न दो
मैं इश्क का एक नासूर हूं ।
©anuragrahi
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