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"मुझे मत जगा "

हे पक्षी मुझे मत जगा,
में गहरी नींद में सौ गया।
क्या कहु में अपनी आपबीती,
मेरे पिंजडे का पक्षी उड गया।
हे पक्षी मुझे मत जगा........
आज तक की दोस्ती निभायी तुने,
तु कितना कोमल,कितना भला ।
अब तुं सिफँ ददँ देगा अपना गला,
हे पक्षी मुझे मत जगा.........
तेरी मीठी आवाज़ का में प्यासा था,
हमारा हरदिन का नाता था।
अब चले जाना मिले जहाँ अच्छी जगह,
हे पक्षी मुझे मत जगा...........
"संकेत " बोलते वक्त याद रखना,
दोस्ती किसी से मत करना।
हम भी बनके रहेंगे तेरे सदा।
हे पक्षी मुझे मत जगा.......
डाँ. माला चुडासमा "संकेत "🌹🌹🌹🌹🌹
©dr.mala