मुझको तो फकत अपकी इरशाद चाहिए
ये जां भी है हाजीर गर जान चाहिए।
कई रंग मुहब्बत के है आशिकी में
मूझे बस मुहब्बत की इक पहचान चाहिए।
बाम-ओ-दर-ए-दिल से दुनिया नुमाइश में है
हमें शाहिद-ए-इश्क में बस अज़ान चाहिए।
कब से मर्हला-ए-दिल सुनसान खाली पड़ा है
बसर के लिए कोई एक मेहमान चाहिए।
क़फ़स में जंजीरों से बंधी ये जिस्म तारिक में
सांस चलने के लिए फकत रोशनदान चाहिए।
इश्क़ मेंअनुराग ने सभी से है खता ही खाया
कोई दिल से समझे इंशां मेहरबान चाहिए।
©anuragrahi
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