मुझसे कौन कौन हुए है खफ़ा देखें हैं
बिच राह जो छोड़ दें ऐसे बेवफा देखें है
रहबर है जो मंजिल तक पहुंचाते हैं सभी को
उनसे भी होते हुए कई खता देखें हैं।
गुनाह-ए-मुहब्बत कबुल उनके इल्तिमास पर
वगरना करने को तो बहुत जफा देखें हैं।
एक जुर्म-ए-इश्क़ ही है जिसका जमानतदार नहीं
वैसे तो हमने ३०२,४०७ जैसे कई दफा देखें हैं।
आ लौट कर चली आ अब साजन के घर को
अजियत में नहीं दिल्लगी में बहुत मुनाफा देखें हैं।
अब नहीं रह पाउंगा तेरे बिन एक दिन एक पल भी
अनुराग ने तेरे भितर मौजूद वो फलसफा देखें हैं ।
©anuragrahi
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