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" मुकद्दर"

कोशिशों ने मुकद्दर से कहा -
तू इस जहां में कहां गुम हो गया...
दुनिया की इस भीड़ में तू कहां खो गया...
लगता है किसी गहन स्वप्न में तू सो गया...
पर किसी दिन तुझे भी लगेगा चलो ,
अब तो सवेरा हो गया....
और कोशिशों का सूर्य उदय हो गया....
कहेगा तू भी अब रोशन कर दूं इसे क्योंकि कोशिशों का सफर पूरा हो गया..
पूरा हो गया....
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