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मुख्तसर हुई जिंदगी को बढ़ाया न जाएगा।

मुख्तसर हुई जिंदगी को बढ़ाया न जाएगा
आप राकिब के नहीं मुझसे बताया न जाएगा।
सवाल-ए-इश्क पर गुफ्तगू होती रात भर
गफलत-ए-इश्क को मुझसे छुपाया न जाएगा।
तेरे फ़िराक़ में एक लम्हा गुज़र गए रहते तन्हा
इस से ज्यादा दिल को और मुझसे रूलाया न जाएगा।
तुझे इल्म है चेहरे पर लाने की तब्बसूम बनावटी
मुझसे दर्द-ए-दिल में मुस्कुराया न जाएगा।
हमने गिता-ओ-कुराने पाक को समझा है करिब से
काफिरों को समझाने का जेहनत मुझसे दिखाया न जाएगा।
कुछ तो करेंगे आपको पाने के लिए हम अनुराग
यूं तो हाथ पर हाथ रखकर मुझसे बैठा न जाएगा।
©anuragrahi