मुकरना मत मुकरने से रिश्ता बना नहीं रहता
फासले बढ जाते हैं एतबार टिका नहीं रहता।
जुबां दी हो तो जुबां की काबिलियत भी रखों
बाजार-ए-जिस्म में शर्म-ओ-हया नहीं रहता।
जो भी कहना सुनना हो शाम के पहले कर लिया करो
शाम के बाद मिजाज मेरा अक्सर अच्छा नहीं रहता।
उसने आईने में मुझे देख अपनी राय क्या क्या बना ली
कोई बताये उन्हें आईने में चेहरा सच्चा नहीं रहता।
तसल्ली दिल के ख़ातिर लोग मंदिर मस्जिद जाते हैं
सिवा दिल के कहीं भगवान खुदा नहीं रहता।
एकतरफ़ा प़ाक प्यार को क्यूँ लोग प्यार नहीं कहते
इसमें क्या दर्द-ए-दिल का सदा नहीं रहता।
©anuragrahi
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